डेरा के गिरोहबाज गुंडों ने सरगना को सजा सुनाए जाने पर उत्पात मचाया, 28 की मौत

रुपेश पाठक

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को यौन हिंसा मामले में 15 साल बाद कोर्ट द्वारा दोषी क़रार दिए जाने के बाद पंजाब और हरियाणा में हिंसक घटनाओं की बाढ़ आ गई है. अब तक हिंसा में 25 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. पंचकुला के सीबीआई कोर्ट से दोषी करार दिए जाने के बाद से ही डेरा समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प की खबरें आने लगी थीं, देखते ही देखते पंचकुला जलने लगा. बेकाबू भीड़ ने मीडिया के ओबी वैंस के साथ तोड़-फोड़ की है. आजतक, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी सहित कई टीवी चैनलों ओबी वैन को आग के हवाले भी किया गया. पागल हो चुकी भीड़ ने देखते ही देखते 200 गाड़ियों व कई निजी व सरकारी प्रतिष्ठानों में आग लगा दिया. पंचकुला में गुरमीत राम रहीम के समर्थकों पर काबू रखने के लिए पुलिस ने टियर गैस और फायरिंग की है.

अब यह सब घट ही रहा था कि दूसरे प्रदेशों से भी हिंसा की खबरें आने लगीं. पंजाब के मनसा और मलोट में रेलवे स्टेशन को डेरा समर्थकों ने आग लगा दिया है . पंजाब और हरियाणा के कई स्थानों से डेरा समर्थकों द्वारा हिंसा की ख़बरें मिल रही हैं. बताया जा रहा है कि 100 से ऊपर लोग घायल हुए हैं. हरियाणा के पंचकुला और पंजाब के फिरोजपुर, बठिण्डा और मानसा में कर्फ्यू लगा दिया गया है. फतेहाबाद, जयतो और फरीदकोट को रेड अलर्ट पर रखा गया है. हिंसा का विस्तार राजस्थान, दिल्ली से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक फैलते दिखने लगा. उत्तराखंड को भी अलर्ट कर दिया गया है.

अचानक से पंचकुला के हालात कश्मीर घाटी से भी बदतर हो चुके थे. डेरा समर्थक मीडिया और पुलिस के जवानों को दौड़ा दौड़ा कर मार रहे थे. एक दिलचस्प तथ्य यह है कि सिर्फ हरियाणा की भाजपा सरकार में ही नही पुलिस और ब्यूरोक्रेसी के शीर्ष पदों पर भारी संख्या में डेरा समर्थक है, इस बात से कत्तई इनकार नही किया जा सकता कि कई मंत्री ,सीएम खट्टर और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी नही चाहते थे कि डेरा समर्थकों पर कारवाई हो. वरना कोई वजह नहीं थी कि 144 लागू होने के बावजूद पंचकुला और दूसरे जगहों पर इतनी भीड़ को इकठ्ठा होने दिया जाता. गुरमीत के चरण स्पर्श करने वालों में हरियाणा के मुख्यमंत्री से लेकर कई सांसद-विधायक शामिल हैं. विधानसभा चुनावों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद डेरा प्रमुख से मिलने डेरा सिरसा पहुंचे थे, जिसके बाद डेरा ने खुला समर्थन दिया था और डेरा समर्थकों का दावा रहा कि हरियाणा की जीत में उनका अहम रोल है. स्थानीय विधायक डेरा नाम चर्चा घरों में हाजिरी भी लगाते रहे है. जलते हुए हरियाणा को देखकर ऐसा लग रहा है कि राज्य सरकार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई तैयारी नहीं थी. यह हिंसा कोई अचानक नहीं भड़की थी, पिछले दो तीन दिनों से यह संभावित तस्वीर खींची जा रही थी. अचानक हिंसा भड़कती तो हालात क्या होते.

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि किस्म-किस्म के ” भक्तों ” की हर तरह की गिरोहबाजी बंद होनी चाहिए ! किसीकि व्यक्तिगत आस्था उसका निजी मामला हो सकता है लेकिन संगठित गिरोहबाजी वाली आस्थाओं का विरोध किया जाना चाहिए.

रुपेश पाठक

 

 

 

 

 

 

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