गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में काठमांडू से लेकर दिल्ली तक प्रदर्शन और सभाएं !

सीपीआई नेता गोविंद पानसरे, तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर, एमएम कलबुर्गी के बाद अब लंकेश गौरी को उनके स्वंतत्र विचारों के कारण निशान बनाया गया. 2014 के बाद से भारतीय समाज में अहिष्णुता और भय का जो माहौल बनाया गया है, उसके कारण यह घटनाएं हो रही हैं.

एक पत्रकार के तौर पर गौरी लंकेश दक्षिणपंथी राजनीति को लेकर आलोचनात्मक रुख रखती थीं. उन्होंने निर्भीक होकर जाति व्यवस्था का विरोध किया था जिसकी वजह से विरोधी उन्हें ‘हिंदुओं से नफ़रत करने वाली’ करार देने लगे थे.

 पत्रकार परॉंजय गुहा ठाकुरता ने गौरी की हत्या को भारतीय मीडिया के इतिहास में एक ‘‘निर्णायक क्षण’’ करार दिया. उन्होंने कहा, ‘‘हम देख रहे हैं कि खुली सोच की गुंजाइश कम होती जा रही है. वे ऐसे लोगों को चुप कराना चाहते हैं जो सत्ता का सामना सच से कराना चाहते हैं. हम चुप नहीं रह सकते, क्योंकि वे तो यही चाहते है. बिल्कुल चुप न रहें. यह उनकी कामयाबी होगी.’’ इसी क्रम में पत्रकार सिद्धार्थ वरदराजन इस घटना को घृणित बताया.

 

बेंगलुरु में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की बुधवार को राजनीतिक दलों, पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी निंदा की. कांग्रेस ने इस मामले को लेकर भाजपा को घेरा तो दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने इस घटना के तार भाजपा या उसके लोगों से कथित तौर पर जुड़े होने के आरोपों को ग़ैर ज़िम्मेदाराना, निराधार और फर्ज़ी क़रार दिया.

वरिष्ठ महिला पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन शुरु हो गए हैं. बेंगलुरु के टाउन हॉल में गौरी लंकेश के परिजनों, दोस्तों ने उनकी हत्या के विरोध में प्रदर्शन किया. इसके अलावा केरल के पत्रकारों ने भी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया. साबरमति आश्रम और दिल्ली प्रेस क्लब में भी इस घटना के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है. बेंगलुरु में कई पत्रकारों ने सभा आयोजन कर गौरी लंकेश को श्रद्धांजलि दीं.

हैदराबाद में मीडियाकर्मियों ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के विरुद्ध प्रदर्शन किया और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की. प्रेस क्लब हैदराबाद के तहत पत्रकारों ने लंकेश की हत्या की निंदा करते हुए नारेबाजी की. उन्होंने प्रेस क्लब से खैरताबाद सर्किल तक मार्च में भी हिस्सा लिया. उनके हाथों में तख्तियां थीं जिनपर, ‘‘मैं भी गौरी हूं’’, ‘‘तुम हत्या के जरिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गला नहीं घोट सकते ’’ जैसे नारे लिखे थे.

विरोध प्रदर्शन का यह क्रम कमोबेश पूरे देश में छाया रहा. पत्रकारों ने गौरी के लिए इंसाफ की मांग की और असहमति की आवाजों को ‘‘दबाने’’ की कोशिश कर रही ‘‘ताकतों’’ से डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here