बुलेट ट्रेन बनाये लेकिन रेल के साथ खेल न करे सरकार

दिलीप खान

बुलेट ट्रेन बनाए सरकार, लेकिन उससे पहले अपनी प्राथमिकताएं तय करें। रेल के साथ खेल न करे.

1. जब देश में 8,000 रेलगाड़ियां चलती थीं तो 18 लाख कर्मचारी थे। अब 22 हज़ार से ज़्यादा गाड़ियां चलती हैं तो कर्मचारियों की संख्या सवा 13 लाख कर दी है.

2. इस वक़्त रेलवे में एक लाख 86 हज़ार पद रिक्त है। सरकार पैसे का बहाना बनाकर पद नहीं भर रही। दूसरी तरफ़, बुलेट ट्रेन में एक लाख करोड़ रुपए फूंक रही है.

3. कर्मचारियों की कमी के चलते हर साल सैकड़ों दुर्घटनाएं होती हैं। NCRB की रिपोर्ट बताती है कि 2014 में 27,581 लोग रेल दुर्घटना में मारे गए.

4. 1950 से 2016 के बीच ट्रेन रूट में 23 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसी दौरान यात्रियों की संख्या 1,344 फ़ीसदी बढ़ गई। रेलगाड़ियों पर बोझ बहुत ज़्यादा है.

5. माल ढुलाई 1,642 फ़ीसदी बढ़ गई। सभी गाड़ियां उन्हीं पटरियों पर दौड़ रही हैं। पटरियां टांय बोल रही हैं.

6. हर साल 5000 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की ज़रूरत है, हो रही है सिर्फ़ 2,700 किलोमीटर.

7. पैसे बचाने के नाम पर रेलवे ने कई काम ठेकेदारों के कंधे पर डाल दिया। ठेकेदार पैसा बचाने के लिए सस्ते में कमज़ोर काम कर रहे हैं.

8. नॉर्मल रेलगाड़ियां समय से नहीं चल रही हैं। पटरियां ठीक से नहीं बिछ रही हैं। रेल में सुविधाएं नहीं दी जा रही है.

 यह पोस्ट दिलीप खान के फेसबुक वाल से साभा

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