पेट्रोल के बढ़ते दाम.. क्योंकि मोदी सरकार का विकास पागल हो गया है

गिरीश मालवीय 

आखिर 31 रुपये का तेल आम जनता को करीब 70 से 79 रुपये प्रति लीटर क्यों बिक रहा है? इसका सीधा जवाब है- मोदी सरकार द्वारा लगाए गए टैक्सों के कारण. मोदी सरकार नवंबर 2014 से अब तक पेट्रोल के उत्पाद शुल्क में 126 प्रतिशत और डीजल के उत्पाद शुल्क में 374 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर चुकी है.

आरटीआई के तहत मिले पिछले पांच सालों के सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि वित्‍त वर्ष 2011-12 के मुकाबले वित्‍त वर्ष 2015-16 में पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क का राजस्व संग्रह पिछले साल बेतहाशा बढ़ा है.

वित्‍त वर्ष 2011-12 में पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वसूली से सरकारी खजाने में 74,701 करोड़ रुपए जमा हुए थे. इसके बाद से इस अप्रत्यक्ष कर के राजस्व में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

पेट्रोलियम पदार्थों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क की वसूली वित्‍त वर्ष 2012-13 में 84,898 करोड़ रुपए और 2013-14 में 88,600 करोड़ रुपए रही थी.

यानी 12-13 से 13-14 के बीच मामूली ही वृध्दि हुई लेकिन इसी परिपेक्ष्य में अगले सालो के आंकड़े देखेंगे तो आप चौक जाएंगे जेसे ही मोदी सरकार सत्ता में आयी है उसने पेट्रोल डीजल के उत्पाद शुल्क से सिर्फ खजाना भरने में जोर दिया है

सरकार ने वित्‍त वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम पदार्थों पर 1,10,354 करोड़ रुपए का उत्पाद शुल्क वसूला था यानी जैसे ही सत्ता में आये लगभग सीधे 22000 करोड़ की बढ़ोतरी उसके बाद 2015-16 का आंकड़ा देख कर आप हैरान रह जाएंगे

वित्‍त वर्ष 2015-16 में सरकार को पेट्रोलियम पदार्थों पर उत्पाद शुल्क की वसूली से 1,98,793.3 करोड़ रुपए का राजस्व हासिल हुआ, जो इसके पिछले साल की तुलना में करीब 88000 करोड़ रूपये अधिक

यानी जो सिर्फ तीन साल पहले मनमोहन सरकार में जो टोटल पेट्रोल डीजल का उत्पाद शुल्क होता था उतना सिर्फ एक साल में 2015-16 में अतिरिक्त रूप से वसूला गया.

सबसे बड़ी बात तो यह हैं कि 2016-17 में भी उत्पाद शुल्क 3 बार बढ़ाया गया है यानी इस बार जो वृद्धि होगी वह अकल्पनीय है.

लेकिन इतना खजाना भरने पर भी मोदी सरकार आम जनता को 1 पैसे की राहत देने को तैयार नही है

गुजरात में सही कहा जा रहा है कि मोदी सरकार का ‘विकास पागल हो गया है’.

यह पोस्ट गिरीश मालवीय के फेसबुक वाल से साभार

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