‘महारत्न’ मोदी के राज में बेरोजगारी

दिलीप खान

इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी है. संक्षेप में पढ़िए कि तीन साल में इस सरकार ने कितने लोगों का रोज़गार छीना है. कुछ अपना भी मिला रहा हूं.

1. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 67 कपड़ा मीलें बंद हो चुकी हैं. इनके 17,600 कर्मचारी बेरोज़गार हो गए. ये संगठित क्षेत्र के कर्मचारी हैं. असंगठित क्षेत्र में कम से कम इससे तिगुने लोग सड़क पर आए हैं. यानी कपड़ा उद्योग में ही मिनिमम 67-68 हज़ार लोगों की नौकरियां गईं.

2. नोटबंदी की जब चाबुक चली तो L&T ने 14,000 लोगों को निकाल दिया. L&T आईटी, मैनुफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, वित्तीय सलाह वगैरह देने वाली कंपनी है.

3. इस साल तीन बड़ी आईटी कंपनियों से कुल मिलाकर लगभग चार हज़ार लोग निकाले गए। TCS, टेक महिंद्रा और इंफोसिस जैसी कंपनियों से. छुटंकियों से तो 10-12 हज़ार तय है. यानी कुल 15-16 हज़ार

4. नोटबंदी के तुरंत बाद HDFC ने 4,581 लोगों को चलता किया. फिर अगली तिमाही में 6,096 लोगों को. यानी छह महीने में 10 हज़ार सिर्फ़ एक बैंक से निकाले गए। देश में कुल 29 प्राइवेट बैंक हैं। सरकार पर मेहरबान होकर कम औसत भी रखें तो कम से कम 50,000.

5. पवन ऊर्जा वाली कंपनी सुज़लॉन और टरबाइन बनाने वाली रेगेन पावरटेक ने पिछले छह महीने में 1,500 लोगों को निकाल दिया. Inox दो महीने से पगार नहीं दे रही है. ऊर्जा क्षेत्र की कई कंपनियों के यही हाल है. सरकार से उदारता बरतते हुए इस क्षेत्र का आंकड़ा 10 हज़ार रखते हैं.

6. 2016 में इस सरकार के फ्लैगशिप स्टार्टअप में से 212 बंद हो गए, जो पिछले साल से 50% ज़्यादा है। एक स्टार्टअप में अगर 10 लोग भी काम करते होंगे तो 3000 लोग बेरोज़गार हो गए.

7. लेकिन सबसे ज़्यादा मार पड़ी है लघु-कुटीर उद्योग पर. चूड़ी, ताले, चप्पल, कप-प्लेट और बेल्ट वगैरह बनाने वाले हज़ारों छोटे कारखाने बंद हो गए और इनमें काम करने वाले दो-तीन लाख लोग बेरोज़गार हो गए.

8. सरकार चालीसा पढ़ने वाले ख़ुद मीडिया ने सैंकड़ों लोगों को बाहर निकाला. नोटबंदी के बाद कम से कम 2,000 लोगों को.

बेरोज़गारी का ये आलम अभी बरकरार रहने वाला है. समूचा कैबिनेट रत्नों से सज़ा है और मोदी जी ख़ुद महारत्न हैं. अच्छे दिन आ गए हैं. ताली बजाइए और उत्साह से बोलिए मोदी, मोदी, मोदी.

 दिलीप खान

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