क्या भाजपा ने टीवी पत्रकारों को अपने खर्चे पर केरल जनरक्षा यात्रा कवर करने भेजा?

न्यूज कैप्चर्ड डेस्क

केरल बीते दिनों राष्ट्रीय मीडिया में एकाएक भाजपा की राजनीतिक सेंधमारी की प्रयोग भूमि बनकर उभरा है. भाजपा लगातार राज्य की पिनरायी विजयन सरकार पर हमले बोलते हुये भाजपा संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या और लव जिहाद के मुद्दे पर धार्मिक ध्रुवीकरण करने के कोशिश कर रही है. पार्टी के मुखिया अमित शाह ने कुछ दिनों पहले सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया मार्क्सवादी के गढ़ कहे जाने वाले कुन्नूर जिले में एक रैली को संबोधित किया. इस रैली का आयोजन भाजपा की जनरक्षा यात्रा की शुरुआत के मौके पर किया गया था जो केरल के 14 में से 11 जिलों में  से गुजरकर 17 अक्टूबर को  राजधानी तिरुअनंतपुरम में एक बड़ी रैली के साथ पूरी होगी.

इस पूरे माहौल के बीच,क्या यह महज संयोग है कि केरल में भाजपा संघ और लव जिहाद का मुद्दा अचानक से खुद को राष्ट्रीय कहने वाली टीवी मीडिया की सुर्ख़ियों में आ गया? क्या ये भी महज इत्तेफाक ही कि एबीपी न्यूज, टाइम्स नाऊ, रिपब्लिक टीवी, आज तक, इंडिया टुडे और नेटवर्क 18 जैसे चैनलों में भाजपा की जन रक्षा यात्रा पर ब्रेकिंग और एक्सक्लूसिव ख़बरें अपने प्राइम टाइम समय पर चलायी? सबसे बड़ा सवाल ये कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुन्नूर पहुंचने पर इन तमाम टीवी चैनलों के वे जाने पहचाने पत्रकार केरल कैसे पहुंच गये जो आम तौर पर दिल्ली में भाजपा बीट की खबरें कवर करते हैं?

सुनने में यह आया है कि इन सबके पीछे खुद पार्टी और केरल में भाजपा के अभियान का नेतृत्व कर रहे बड़े नेताओं का दिमाग है. उन्होंने भाजपा बीट के पत्रकारों को खुद अपने खर्चे से केरल में पार्टी की जनरक्षा यात्रा को कवर करने का निमंत्रण दिया है. ये तक कहा जा रहा है कि पार्टी ने इन पत्रकारों का केरल तक का विमान का खर्च खुद उठाया है और केरल में उनके ठहरने का इंतजाम भी खुद किया है.

आश्चर्य नहीं कि बीते दिनों रिपब्लिक टीवी   समेत कई और चैनलों ने योगी आदित्यनाथ की जनरक्षा यात्रा को ‘एक्सक्लूजिव’ कहकर प्रसारित किया. ये अलग बात है कि केचरी में आदित्यनाथ को कवर करने के दौरान रिपब्लिक टीवी के प्रतिनिधि को पुलिस ने कुछ समय तक आदित्यनाथ के समीप नहीं आने दिया, जिसके चलते वे कैमरे पर अभद्र भाषा में अपना गुस्सा जाहिर करते हुये सुनायी दिये. नीचे दिये गए वीडियो में ठीक पांचवें मिनट पर उनके गुस्से को सुना जा सकता है.

भाजपा द्वारा राष्ट्र स्तर पर केरल में वाम पार्टियों के खिलाफ अभियान छेड़ने की बात को सहज समझा भी जा सकता है. बीते दिन केंद्र सरकार और पार्टी के लिये अच्छे नहीं रहे हैं. आर्थिक हालात लगातार पार्टी के दावों के खिलाफ जा रहे हैं, भाजपा की राज्य सरकारों की छवि बीते दिनों धूमिल हुई है. रही सही कसर जय अमित शाह पर लग रहे आरोपों ने पूरी कर दी है. ऐसे में राष्ट्र स्तर पर इन समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिये कुन्नूर एक उग्र एजेंडा मुहैया कराता है.

वहीं कुन्नूर जिले में भाजपा की कोशिशों के खिलाफ टीवी चैनल प्रकाश करात का बीते दिनों दिया गया एक बयान भी पचा गए हैं. करात ने कहा था कि कुन्नूर में भाजपा सीपीआईएम के लिये कभी कोई खतरा नहीं रही. करात ने यह भी जोड़ा था कि सीपीआईएम की कुल सदस्यता का पांच से दस प्रतिशत कुन्नूर से आता है, इस जगह पर तो भाजपा सत्तारूढ़ दल के सामने राजनीतिक तौर पर कहीं टिकती ही नहीं है फिर पार्टी भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या क्यों करेगी?

वैसे केरल में भाजपा के नेता स्वयं मारे गये कार्यकर्ताओं की संख्या पर दो किस्म की बातें बोल रहे हैं. अमित शाह ने दावा किया था कि अब तक राज्य में भाजपा-आरएसएस के क़रीब 120 कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है. जबकि योगी आदित्यनाथ ने यह संख्या 283 कार्यकर्ताओं तक बताई. राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि वास्तव में सीपीआईएम और भाजपा दोनों के कार्यकर्ता राज्य में बराबर संख्या में मारे गये हैं.

इस बात के भी कयास लगाये जा रहे हैं कि कम से कम स्थानीय मीडिया ने भाजपा की जनरक्षा यात्रा को तवज्जो नहीं दी. वहां बीते दिनों जनरक्षा यात्रा के दौरान यह खबर प्रमुख रही कि सुपरस्टार दिलीप को हाईकोर्ट से जमानत मिलेगी या नहीं.

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