गुजरात चुनाव तारीख विवाद पर वह ट्वीट जो चुनाव आयोग की पोल खोलता है !

अभिनव श्रीवास्तव

चुनाव आयोग द्वारा कल गुजरात विधान सभा चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं करने की वजहों पर कयासों और अटकलों का सिलसिला जारी है. हालांकि चुनाव आयोग अब तक इस बात के लिये कोई ठोस वजह नहीं दे पाया है कि क्यों उसने कल बेहद संदेहास्पद स्थितियों में केवल हिमांचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव की तारीख घोषित की और गुजरात को छोड़ दिया. वहीं कल दिन भर के घटनाक्रम में ऐसे कई संकेत मिले हैं जिनसे यह पता लगता है कि आयोग को वास्तव में गुजरात और हिमांचल, दोनों राज्यों के लिये तारीखों की घोषणा करनी थी.

सबसे पहले इस बात की पुष्टि पत्र सूचना कार्यालय पीआईबी के ट्विटर हैंडल एकाउंट के एक ट्वीट से होती है. इसमें यह स्पष्ट रूप से लिखा है कि चुनाव आयोग हिमांचल प्रदेश और गुजरात के विधान सभा चुनावों के लिये तारीखों की घोषणा करेगा. यह गौर करने वाली बात है कि आयोग के लिये आधिकारिक घोषणाओं को इसी ट्विटर एकाउंट से जारी किया जाता है. दूसरी बात ये कि पीआईबी का यह ट्वीट एक पिंन्ड Pinned ट्वीट था. यानि यह ट्वीट पीआईबी की ओर से कल किया गया सबसे प्रमुख और ऊपर रहने वाला ट्वीट था. इसमें फेर बदल की कोई गुंजाइश नहीं थी. जाहिर है कि आख़िरी समय तक चुनाव आयोग की ओर से पत्र सूचना कार्यालय खुद दोनों राज्यों में चुनाव तारीखों की घोषणा की बात कह रहा था.

वहीं आज चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर आज सीपीएम पोलित ब्यूरो ने यह कहते हुये सवाल उठाया है कि सामान्यता अगर किन्हीं दो राज्यों में विधानसभा चुनाव छह महीनों के भीतर तय हों तो उन राज्यों में चुनाव की तारीख की घोषणा एक साथ की जाती है और दोनों राज्यों में एकसाथ आचार संहिता एक ही दिन से लागू होती है. अब तक ऐसा ही होता आया है. हिमाचल प्रदेश में आचार संहिता तो लागू हो गई है, लेकिन गुजरात में स्थिति ऐसी नहीं है और गुजरात में आचार संहिता लागू  नहीं की गई.

पार्टी के इस सवाल पर चुनाव आयोग का तर्क खुद आयोग की ही मंशा पर सवाल खड़े कर रहा है. चुनाव आयोग का कहना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों के नतीजों एकसाथ 18 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे. अगर आयोग चुनाव नतीजे एक साथ लाने की बात कह रहा था तो उसे इस बात के अनुरूप ही दोनों राज्यों में एक साथ आचार संहिता लगाने की घोषणा भी करनी चाहिये. आयोग की विश्वसनीयता पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी ने भी सवाल उठाये हैं.

वहीं इस बात की चर्चा तेज है कि आयोग ने सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के दबाव में गुजरात विधान सभा चुनाव की घोषणा नहीं की. आने वाले हफ्ते में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात दौरे पर कुछ बड़ी घोषणाएं करने वाले हैं. गुजरात चुनाव की तारीख घोषित होने की स्थिति में वे ये घोषणाएं नहीं कर सकते थे. दूसरी तरफ मुद्दे को गरमाते देख आज भाजपा शासित अहमदाबाद नगर निगम ने अपनी स्टैंडिंग समिति की बैठक का समय डेढ़ घंटे बढ़ाते हुये आनन फानन में 530 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं का प्रस्ताव महज 10 मिनट में पास कर दिया.

अभिनव श्रीवास्तव 

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