शिवपाल कार्यकर्ताओं, गरीबों वंचितों के प्रतिनिधि हैं !

यह लेख जनेश्वर जी ने मार्च 2009 को समाजवादी युवजन सभा द्वारा प्रकाशित होने वाली लघु पुस्तिका में लिखा था जिसका ध्येय पांचवे राज्य अधिवेशन में नव -निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के व्यक्तित्व से नई दिल्ली व राष्ट्रीय मीडिया को अवगत कराना था। न्यूज़ कैप्चर्ड उत्तर प्रदेश के कुछ महत्वपूर्ण शख्सियतों के व्यक्तित्व पर एक सीरीज प्रस्तुत कर रहा है। इसी कड़ी में हम आने वाले कुछ दिनों में शिवपाल यादव के व्यक्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर बात करेंगे।  संपादक 

जनेश्वर मिश्र 

दिल्ली की राजनीति में जब भी किसी को कोई राजनीतिक पद मिलता है तो राजनीतिक गलियारे में उसके व्यक्तित्व और कामों से अधिक चर्चा इस बात पर होती है कि पद पाने वाला व्यक्ति किसका खास या किसका आदमी है ।  शिवपाल जब रामशरण भाई के जाने के बाद समाजवादी पार्टी का अध्यक्ष बना, तो दिल्ली के नेताओं और पत्रकारों ने मुझसे पूछा ” शिवपाल किसके आदमी हैं ?”। मैंने वही जवाब दिया जो मैंने महसूस किया की शिवपाल कार्यकर्ताओं, गरीबों – वंचितों के प्रतिनिधि हैं ।  बरेली में ही मैंने कहा था कि रामशरण और हम लोग बूढ़े हो गए हैं, चलने -फिरने की दिक्कत होती है, हम दोनों को छुट्टी दो, मुलायम सिंह बोले कि जब तक आप लोग जिन्दा रहोगे, तब तक पद पर रहोगे, मुलायम हमारे नेता हैं, उनकी बातों को अस्वीकार करना संभव नहीं था, पर सच यह है कि रामशरण भले अध्यक्ष रहें हों पर प्रदेश में गरीब, मजलूमों के लिए संघर्ष, धरना-प्रदर्शन की अगुवाई से लेकर मीटिंग, अधिवेशन वगैरह का संयोजन आदि सब शिवपाल ही करते रहे हैं । उनके मेहनत और ईमानदारी पर कोई उंगली नहीं उठा सकता । लेकिन मैंने उसके काम को देखते हुए मुलायम और बाकी नेताओं से कहा कि शिवपाल को प्रदेश की जिम्मेदारी दो  । संगठन चलाने के लिए जो गुण चाहिए, उसमें है  । वह हम सब बूढ़ों और नए रंगरूटों के बीच पुल का काम बढ़िया से कर सकेगा । मुलायम, राम शरण और मैं सभी उसे उतना ही मानते हैं जितना छोटा कार्यकर्ता ।  मेरी तो सब से बात होती रहती है, सब आकर बताते हैं कि मायावती सरकार से लड़ने वालों में शिवपाल अव्वल हैं,  ऐसे 5-6 नेता और मिल जाएं तो जालिम सरकार को हम लोग इस बुढ़ौती में भी पलट दें ।  वह जब भी दिल्ली आता है, मेरे पास अगर घंटों बैठता है, कभी-कभी पूरा दोपहर,  इतनी इज्जत देता है कि शब्दों में बता नहीं सकता  ।  कद्दावर सड़क मंत्री रह चुका है, मुलायम का भाई है, हमारा नेता है, फिर भी राज-रोग से दूर है, वैसे ही वैसे ही पैर छूता है , जैसे पहले छूता था, मांग के मिठाई खाता है, जैसा पहले खाता था । जितना शालीन है, उतना ही जिद्दी है, जीत पर आएगा तो सरकार उखाड़ फेंकेगा । यह मुलायम का लक्ष्मण भी है, हनुमान भी ।

शिवपाल जयशंकर प्रसाद की कहानियों वाला ”नन्हकू सिंह” है , ऐसा लड़ाका  है जो जहां अन्याय देखता है, खड़ा हो जाता है, अड़  जाता है  ।

जो लोग गुंडई व बहादुरी का फर्क नहीं समझते , वे ही शिवपाल को गुंडा कहते व समझते हैं। समय के साथ शिवपाल में बहुत परिपक्वता आई है। क्योंकि उसमें सीखने की ललक है। जब मैंने अपने से छोटे उम्र में छोटे मुलायम को नेताजी बोला था तो कई सोशलिस्ट नेताओं ने कहा कि जनेश्वर पछताओगे।  मैंने जो महसूस किया वह बोला , मुलायम सिंह का संघर्ष देखकर नेता कहा था। आज वही साथी कहते हैं, जनेश्वर तुम सही थे, मुलायम ने समाजवाद के झंडे को झुकने नहीं दिया,एकदिन मुलायम का यह भाई बहुत आगे जाएगा। दुखियारों की लाठी बनेगा। शिवपाल की खासियत है जिसके नाते यह हम सभी का चहेता है, किसी भी मोर्चे पर लगा दो डटा रहता है, कोई काम या जिम्मेदारी सौंप दो, फिर दाएं बाएं, नहीं देखता। अध्यक्ष बनने के बाद यह पहली ही कसौटी पर खरा उतरा। उप चुनाव में शिव काल की सेना भदोही की लड़ाई जीत कर लौटी है।

शिविरों में शिवपाल की सक्रियता गजब की होती है।  जनता और भीड़ से वो भागता नहीं।  वह कजाम करने वाला नेता है।  उसे देख कर लगता है कि हमारे बाद  की पीढ़ी आंदोलन को, समाजवाद को और आगे बढ़ाएगी। 15वीं लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी यूपी में अव्वल रही। हाथ और हाथी दोनों को पीछे धकेल दिया। बारह में जब यूपी वाले चुनाव होगा तो यह पलटन हाथी का राज पलट देगी। पता नहीं तब  मैं रहूंगा कि नहीं रहूंगा, सुकूं वाली बात है कि शिवपाल वगैरह  अच्छा काम कर रहे हैं। हमारे जाने के बाद भी गांव,गरीब, कमजोर की लड़ाई कमजोर नहीं होगी, मुलायम कमजोर नहीं पड़ेंगे।

ज्ञान सिर्फ विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है , कबीर , तुलसी, प्रेमचंद का ज्ञान प्रोफेसरों वाले ज्ञान से ज्यादा विस्तृत व गहरा  है।  मुझे पूरा विश्वास है की शिवपाल और उसकी टोली आने वाले दिनों में समाजवादी आंदोलन को मुकम्मल अंजाम तक पहुंचाएगी, नया आकाश देगी।

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