शिवपाल सच्चे लोहियावादी हैं, तभी बेघर हुए तिब्बतियों के लिए उनके दिल में इतना प्यार है !

न्यूज़ कैप्चर्ड उत्तर प्रदेश के कुछ महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण शख्सियतों के व्यक्तित्व पर एक सीरीज प्रस्तुत कर रहा है। इसी कड़ी में हम आने वाले कुछ दिनों में शिवपाल यादव के व्यक्तित्व से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आज के दौर के सशक्त हस्ताक्षरों के विचार प्रस्तुत करेंगे। संपादक

दाबा क्षीरिंग
सांसद -तिब्बत

पिछले साल की बात है, मेरे नेतृत्व में 7 सांसदों को उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में घूमकर तिब्बत की आजादी के लिए जनमत बनाने का काम सौंपा गया। इसी सिलसिले में भाई शिवपाल से मुलाकात हुई। उन्होंने हमारे ग्रुप का ग्रांड वेलकम किया। प्रेस रिलीज जारी कर तिब्बत की आजादी का समर्थन किया। उन्होंने हमारी एक-एक बात सुनी। बातचीत के दौरान उन्होंने दो सलाह ऐसी दी जिस पर अमल कर हमारे आंदोलन को बहुत विस्तार मिला। वे सच्चे लोहियावादी हैं, तभी हम बेघर हुए तिब्बतियों के लिए उनके दिल में इतना प्यार है।  लोहिया पहले राजनेता थे जिन्होंने पंडित नेहरू को तिब्बत के बारे में चेताया था। लोहिया की बात नेहरू मान लेते तो तिब्बत की समस्या नहीं होती। होली हाइनेस दलाई लामा भी लोहिया की काफी इज्जत करते थे, वे कई बार मंचों से खुद को समाजवादी कह चुके हैं।  इसलिए शिवपाल से संवाद के दौरान हमारे सभी दोस्तों को लगा कि वे किसी अपने से ही बात कर रहे हैं।

शिवपाल संघर्ष की कोख से निकले हैं, वह मेहनत के बल पर पसीना बहाकर यहां इतनी बुलंदी तक पहुंचे हैं , इसलिए उन्हें मेहनतकशों के पसीनें की कद्र है। शिवपाल जी ने चीन की उपनिवेशवादी नीति के खिलाफ कई बार बोला है। भारत की बड़ी जमीन पर चीन का कब्ज़ा है,उसने तिब्बत तो पूरा ही हड़प लिया है।  भारत और तिब्बत का एक दर्द है।  हमारी लड़ाई शिवपाल जैसे नेतागणों के समर्थन से और व्यापक व मजबूत हुई है। शिवपाल का तिब्बती समाज अभिवादन करता है।

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