प्राइवेट स्कूलों पर डिप्टी सीएम का बड़ा फैसला, नहीं माना तो सरकार चलाएगी उनका स्कूल !

deputy cm dinesh sharma will take action private school
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डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने मीडिया सेंटर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुक्रवार को कहा, ”हमने प्राइवेट कॉलेजों की फीस बढ़ोत्तरी पर रेगुलेट करने के लिए कई नियम बनाए और संशोधित किए हैं। जिससे फीस बढ़ाने वाले कॉलेज सरकार के अनुसार ही बढ़ा सकेंगे। वरना उनका स्कूल सरकार अपने कब्जें में लेकर खुद चलाएगी।

क्या हैं वो नियम ?

ये नियम ऐसे स्कूलों पर लागू नहीं होंगे जिनकी फीस सालाना 20 हजार रुपए होगी। इससे ज्यादा वाले इन सभी नियमों के दायरे में आएंगे। द‍िनेश शर्मा ने कहा, स्कूल प्रबंधन और अभिभावक दोनों से ही हमने उनके पक्ष लिए हैं। इसमें प्रदेश में चलने वाले सभी स्कूलों को इसके दायरे में लाया जा रहा है। हर साल की फीस प्रकिया को 3 चरणों में बांट दिया गया है। पहला-संभव शुल्क, दूसरा- ऐक्षिक शुल्क, तीसरा- विकास शुल्क अधिभार। स्कूल छोड़ते समय बच्चों का काशन मनी वापस करना होगा। अब स्कूल में व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाले आय को स्कूल की आय ही माना जाएगा। जिसमें कैंटीन भी शामिल है। उसकी भी रेट वाजिब हों। इसकी देखरेख की जाएगी। हर मंडल में ‘जोनल फीस कमेटी’ की व्यवस्था की गई है। सत्र के अंत या प्रारम्भ में ही शुल्क बढ़ाया जा सकता है। स्कूल को अपनी वेबसाइट और स्कूल के नोटिस बोर्ड पर फीस और आय का ब्यौरा प्रकाशित करना होगा। जिसमें कितनी फीस है। बढ़ोत्तरी कितनी हुई। किस मद में हुई सब कुछ ट्रांसपैरेंट दिखाना होगा।

लगेगा जुर्माना-

कोई भी स्कूल एक साथ पूरे साल की फीस नहीं ले सकता। कोई भी स्कूल किसी खास दूकान से सामान खरीदने के लिए भी बाध्य नहीं कर सकता। शुल्क बढ़ाने की प्रक्रिया को नियंत्रित किया जा रहा है। इस व्यवस्था को समिति के माध्यम से चलाया जाएगा जिसमें विशेषज्ञों को रखा जाएगा। पहली बार नियमों को तोड़ने वाले स्कूल पर 1 लाख, दूसरी बार 5 लाख और तीसरी गलती पर स्कूल की सम्पूर्ण राशि को सरकार के खजाने में जमा करा दिया जाएगा। उसके बाद उस स्कूल को सरकार चलाएगी। डिप्टी सीएम ने कहा, ”हमने प्राइवेट स्कूलों के लिए एक प्रारूप तैयार किया है। जिसे जनता के सामने उनके सुझावों के लिए रख रहे हैं। जो भी सुझाव और संशोधन आएगा उसको जोड़ने के बाद उसे कैबिनेट में पास कराया जाएगा। हमने इसे ड्राफ्ट करने के लिए कई प्रदेशों की माॅनिटरिंग सिस्टम और फीस रेगुलेटरी नियमों का अध्ययन किया। इस दौरान हमारे साथ कई एजूकेशनल एक्सपर्ट भी साथ रहे।

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