उत्तर प्रदेश में एक सरकारी विद्यालय ऐसा भी!

न्यूज कैप्चर्ड डेस्क

वैसे तो देश में सरकारी विद्यालय अक्सर संसाधनों की कमी और गुणवत्ता के चलते चर्चा में बने रहते हैं, लेकिन कुछ विद्यालय ऐसे भी हैं जो अपने छोटे लेकिन साहसिक प्रयासों से इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश में बाराबंकी के पास देवां ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय अटवटमऊ इसका एक उदाहरण है. यहां बीते 11 दिसंबर को विद्यालय के कक्षा कक्ष का लोकार्पण और वार्षिक पत्रिका उड़ान का विमोचन कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्वयं विद्यालय के प्रयासों की सराहना की.

दरअसल, हर सरकारी विद्यालय की तरह इस प्राथमिक विद्यालय में भी कुछ समय पहले तक नौनिहालों के लिये बुनियादी सुविधाओं का अभाव था. उन्हें जमीन पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी. विद्यालय में फर्नीचर और पानी के लिये नल नहीं थे. इन सुविधाओं की कमी के चलते ही यहां के स्थानीय लोगों में निजी स्कूलों के प्रति आकर्षण था.

विद्यालय के प्रधानाचार्य अनुज श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे हालातों में कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में भेजना नहीं चाहता. इसलिये विद्यालय में सबसे पहले हमनें बुनियादी सुविधाओं को बहाल करना अपना लक्ष्य बनाया. विद्यालय परिवार और सामुदायिक सहयोग से हमनें बीते कुछ समय में इस दिशा में काफी सफलता अर्जित की है. अच्छी बात ये है कि इसके लिये हमें विद्यालय में ही सहायक शिक्षक के तौर पर काम कर रहे अनुपम मिश्र से खासा सहयोग मिला है. उन्हीं के प्रयासों से बच्चों को फर्नीचर मिल सका. वास्तव में, विद्यालय की वार्षिक पत्रिका उड़ान इन प्रयासों का ही लेखा-जोखा थी. वहीं, इस पत्रिका में विद्यालय के कुछ बच्चों ने भी अपना रचनात्मक योगदान दिया.

यह गौर करने वाली बात है कि भारत में शिक्षा का अधिकार कानून पास हुये लगभग 8 वर्ष पूरे हो चुके हैं. इस क़ानून के अनुच्छेद 2, 6 और 7 में सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य बनाने का प्रावधान है. हालांकि अंततः क़ानून के ही अनुच्छेद 8(b) और 8(d) के तहत ये जिम्मेदारी राज्य सरकारों और स्थानीय संस्थाओं पर है. लेकिन उत्तर प्रदेश में शिक्षा की स्थिति बेहद निराशाजनक है. वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट, 2016 (एएसईआर,2016) के अनुसार, प्रदेश के लगभग 54 स्कूलों में शौचालय हैं. इनमें भी केवल 51 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों और लड़कों के लिए अलग-अलग शौचालय हैं. इसके अलावा केवल 42 प्रतिशत स्कूलों में लाइब्रेरी है. इस लिहाज से स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा होना तो फिलहाल दूर की कौड़ी लगती है. आंकड़ो के अनुसार, सूबे के लगभग 97 फीसदी स्कूलों में कंप्यूटर की बुनियादी सुविधा नहीं है.

जाहिर है कि ऐसी स्थिति में प्राथमिक विद्यालय अटवटमऊ के प्रयास उम्मीद की किरण की तरह हैं. हालांकि, विद्यालय प्रशासन के इन प्रयासों को अगर सरकारों से अपेक्षित सहयोग मिला होता, तो शायद यह स्थितियां और बेहतर होतीं. इस मौके पर हुये सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों ने पूरे उत्साह से भागीदारी की. कार्यक्रम को सफल बनाने में गांव के स्थानीय निवासियों का सहयोग भी विद्यालय परिवार को मिला. इस मौके पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी पी एन सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी मनमोहन सिंह, प्रधानाचार्य अनुज श्रीवास्तव और सहायक अध्यापक अनुपम मिश्र भी मौजूद थे.

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