सूरज एक , चंदा एक , तारे अनेक ! भीम सैन की 1974 की एनिमेटेड फ़िल्म एक बार फिर देखे जाने की जरूरत है !

अभिषेक प्रकाश के फेसबुक वॉल से |

भीम सैन ने 1974 में एक एनिमेटेड लघु फ़िल्म बनाई एक गीत के रूप में “एक अनेक एकता”. दूरदर्शन के ज़माने में यह खूब देखी सुनी गई. ‘अनेक जब एक होते है’ तो कितनी हिम्मत और ताकत आती है इसमें यह बखूबी समझाया गया खासकर बच्चों को. इसमें एक बच्चा पूछता है कि दीदी ये ‘अनेक’ क्या होता है. तब उसकी दीदी समझाती है कि “जैसे सूरज एक,चंदा एक और एक-एक -एक करके हुए तारे अनेक”. ये होता है अनेक. फिर वह अनेक के एक होने की कहानी उसे ‘बहेलियां और चिड़िया’ की कहानी के माध्यम से समझाती है जिसमें दाना चुगने बैठी चिड़िया को बहेलिया धोखे से फंसा तो लेता है लेकिन चिड़िया अपने एकता की ताकत को महसूस करती है और जाल लेकर ही उड़ जाती हैं.उनको उड़ता देख चिड़ियों का दोस्त चूहा पीछे-पीछे दौड़ता है और जाल को काटकर उनको आज़ाद कर देता है.

वास्तव में यह हमारी सभ्यता की, हमारे उद् विकास की हमारे ज़िद की कहानी है. जो यह होमो सेपियंस की वह ताकत थी जिससे तमाम विपरीत परिस्थितयों में जूझते हुए उसने अपनी कहानी सबसे अलग लिखी. लेकिन ये आज क्या कर रहे है हम! रंग-रूप,खाना-पहनावा, पूरब-पश्चिम, पूजा-पाठ, धर्म,संगीत कोई भी ऐसी चीज़ बची है क्या जिसके लिए हम लड़ ना रहे हों. इन्हीं सब कमजोरियों पर ही तो विजय पाने की अब तक की जद्दोजहद रही हमारी. अब क्या हुआ जो किसी की आवाज़ से उसके खाने से उसके गाने से उसके साथ में रहने से हम लड़ने लगे. हमने तो मिल के ये दुनिया बनाई थी. हज़ारो बर्ष से ऐसा ही तो चलते आया है कि तुमने मक्का उगाया तो हमने चावल! लेकिन हम सभी मिल-बाँट कर खाते हैं. देखो तो किसी भाई ने बल्ब का आविष्कार किया लेकिन रोशनी हम सभी पाते हैं! तो फिर ये नफरत की दीवार इतनी मज़बूत कैसे होते जा रही है. मंदिर-मस्जिद आज हमें जोड़ नहीं पा रहे क्यों?अगर इतनी नफरत वहां से सीखते हो भाई तो अभी भी समय है मिटा दो उन प्रतीकों को!फाड़ के फेक दो उन लाइनों को जहाँ से तुम इतनी हिंसा और नफ़रत पाते हो!

अभिषेक प्रकाश , पूर्व में ऑल इंडिया रेडिओ में , वर्तमान में पुलिस उपाधीक्षक, उत्तर प्रदेश पुलिस

 

 

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