बसीरहाट को सुलगाने वाले गुनहगार चेहरे कब होंगे बेनकाब !

पंकज चतुर्वेदी

राजनीतिज्ञों के आपसी झगड़े बसीरहाट को शांत नहीं होने दे रहे हैं, मुख्यमंत्री और राज्यपाल के आपसी जुबानी जंग ने उन हज़ारों लोगों की उम्मीदों और प्रयासों पर पानी फेर दिया है जो चाहते है कि गत सोमवार को शुरू हुआ सांप्रदायिक तनाव अतीत की बात बन जाये.
बसीरहाट, बंगाल के उत्तरी चौबीस परगना जिले का एक बड़ा सब डिविजन है इसकी आबादी कोई दो लाख है. यहाँ इस्लाम लगभग 1200 इसवी में आया था, यहाँ की पहली मस्जिद 1466 में बनी थी. इस इलाके में मुसलमान सदा से बहुमत में रहे हैं लेकिन इलाके में सांप्रदायिक तनाव दुर्लभ हुआ है. यहाँ का डिग्री कालेज नवम्बर 1947 में शुरू हुआ था, कालेज के लिए अपना घर, राय बहादुर अब्दुल रहमान ने दिया और उसका शिलान्यास जनसंघ के नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने किया.
यह सही है कि बगल के बांग्लादेश से लगातार आये घुसपैठियों ने इस इलाके के सौहार्द और माहौल को खराब किया हुआ है. इस इलाके में जहां बंगलादेशी मुसलमान भड़काऊ हैं तो दक्षिणपंथी अपनी सत्ता के लालच में भड़काऊ हरकतें करते रहते हैं . यहाँ दंगे का माहौल चैम्पियन ट्राफी में पकिस्तान से मैच के बाद ही बनने लगा था, अफवाह उड़ाई गई कि मुसलमानों ने पाकिस्तान की जीत पर खुशियाँ मनाई लेकिन ऐसा कोई तथ्य सामने आया नहीं, जो काम अफवाह नहीं कर सकी, वह अनर्थ दसवीं में पढने वाले एक बच्चे के व्हाट्स एप सन्देश ने कर दिया, उसने कुछ ऐसा साझा किया जिसमें इस्लाम के विरूद्ध अभद्रता थी, यह बालक सौविक सरकार बादुरिया कसबे से चार किलोमीटर दूर रुद्रपुर में रहता हैं, सौविक के मुस्लिम पडोसी कहते हैं कि वह बच्चा इतना तेज नहीं है कि वह फोटोशॉप आदि पर काम कर सके, जाहिर है कि उस बच्चे को किसी ने मौहरा बनाया.
उस बालक सौविक का अतीत जानना जरुरी है, फिलहाल वह पुलिस अभिरक्षा में है, दस साल पहले उसके पिता ने अपनी पत्नी की ह्त्या कर दी थी और वह आज भी जेल में है. वह अपने चाचा बबलू सरकार के संरक्षण में रहता है, क्रिकेट का दीवाना यह किशोर पढाई और संसाधन दोनों में औसत है .
सोमावर की रात उपद्रवियों ने सबसे पहले सौविक के रुद्रपुर स्थित घर को आग लगायी. कम संख्या में होने के बावजूद कुछ संघियों ने कोहराम किया, उसके बाद उपद्रवी मुसलमानों की भीड़ ने बादुरिया, स्वरूपनगर, ताकि, भेव्ना, बेडा चाम्पा आदि में खूब उत्पात मचाया, बाज़ार लुटे गए, आग लगायी गयी. दंगा गाँव स्तर तक भड़का और पुलिस बल इतना था नहीं कि हर स्थान तक पहुंचे , जहां मुसलमान बाज़ार में कोहराम काट रहे थे तो संघी घर बैठ कर सोशल मीडिया पर अफवाहों से उसे भडका रहे थे. उत्पातियों ने भेव्ला रेलवे स्टशन पर गुंडई की और यात्रियों को मारा. हास्नाब शाखा पर रेल याता यात रोक दिया गया. हरिशपुर, मेगिबागन आदि में बसों को फूंका गया. शर्मनाक है कि जिले कि पुलिस ना तो हालात संभाल पाई और ना ही उसके खुफिया तंत्र ने काम किया. आज बदुरिया सहित कई कस्बो और गावों में स्थानीय लोग शान्ति के लिए एकजुट हो रहे हैं, जुलुस निकाल रहे हैं, वहीँ संघी राज्यपाल के साथ और मुसंघी ममता के साथ इस आग को सुलगते रहने देना चाहते हैं. स्थानीय लोग कहते है कि लूटपाट और आगजनी अकरने वाले घुसपैठिये बंगलादेशी मुसलमान हैं.
एक तो पूरे काण्ड कि निष्पक्ष जांच हो, सौविक को इसके लिए उकसाने वाले का चेहरा बेनकाब हो, दंगे यदि घुसपैठिये हैं तो उन्हें देश निकाले कि कार्यवाही हो, सबसे बड़ी वहां शान्ति हो .

पंकज चतुर्वेदी स्वतंत्र पत्रकार हैं .

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