ईपीडब्ल्यू की रिपोर्ट पर क्यों बिफर पड़े अडानी

अभिनव श्रीवास्तव

खबर है कि अडानी पावर लिमिटेड के मालिक गौतम अडानी ने अंग्रेजी पत्रिका इकानामिक एंड पोलिटिकल वीकली (ईपीडब्ल्यू) को उसकी एक खोजी रिपोर्ट (http://www.epw.in/journal/2017/24/web-exclusives/modi-governments-%E2%82%B9500-crore-bonanza-adani-group-company.html) के लिये मानहानि का कानूनी नोटिस भिजवाया है. दरअसल,  सत्रह जून को प्रकाशित इस रिपोर्ट में पत्रिका ने यह बताया है कि कैसे मोदी सरकार के उद्योग और वाणिज्य मंत्रालय ने विशेष आर्थिक क्षेत्रों (स्पेशल इकानामिक जोन) से जुड़े नियमों में फेर-बदलकर अडानी समूह की एक कंपनी को 500 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाने की कोशिश की.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इस सन्दर्भ में वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने पत्रिका द्वारा भेजी गयी विस्तृत प्रश्नावली का कोई जवाब नहीं दिया. रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद बीती 5 जुलाई को अडानी समूह की ओर से विधि फर्म ठक्कर एंड कंपनी ने पत्रिका को मानहानि का नोटिस भिजवाया. वहीं ईपीडब्ल्यू ने भी नोटिस का जवाब देते हुये कहा है कि उसकी रिपोर्ट न सिर्फ तथ्यों पर आधारित है बल्कि उसके पास इन तथ्यों के प्रामाणिक दस्तावेजी साक्ष्य भी उपलब्ध हैं जो आवश्यकता पड़ने पर सार्वजनिक भी किये जा सकते हैं. पत्रिका की ओर से यह जवाब वकील चंद्रचूड़ भट्टाचार्य ने देते हुये कहा है कि यह रिपोर्ट व्यापक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुये प्रकाशित की गयी है जिसका अधिकार भारतीय संविधान देता है.

वरिष्ठ पत्रकार और अर्थशास्त्री परंजाय ठकुरता गुहा के संपादन में निकलने वाली पत्रिका का दावा है कि अगस्त, 2016 में वाणिज्य विभाग ने स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स रूल्स (सेज़ नियमों), 2016 में संशोधन करते हुये उसमें एक नया प्रावधान जोड़ा था, जो स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स एक्ट (सेज़ एक्ट), 2005 के तहत रिफंड के दावों से जुड़ा था. सेज़ एक्ट के तहत किये गये इस संशोधन से पहले किसी तरह के रिफंड का कोई प्रावधान नहीं था और  यह संशोधन खासतौर पर अडानी पावर लिमिटेड (एपीएल) को लगभग 500 करोड़ रुपए के करीब की कस्टम ड्यूटी के रिफंड का दावा करने का मौका देने के लिए किया गया था. इस रिपोर्ट में लिखा गया है- एपीएल का दावा है कि उसने कच्चा माल और अन्य कंज्यूमेबल्स (इनपुटों) पर यानी बिजली के उत्पादन के लिए मुख्यतः कोयले के आयात पर कस्टम ड्यूटी चुकाई है. लेकिन, ईपीडब्लू को मिले दस्तावेजों के मुताबिक दरअसल एपीएल ने मार्च 2015 के अंत में कच्चा माल और उपभोग की वस्तुओं पर बनने वाली करीब 1000 करोड़ रुपए की ड्यूटी चुकाई ही नहीं. पहली नज़र में ऐसा लगता है कि सेज़ नियमों में संशोधन करके उसमें कस्टम ड्यूटी का रिफंड मांगने का प्रावधान डालकर वाणिज्य विभाग एपीएल को एक ऐसी ड्यूटी पर रिफंड का दावा करने की इजाज़त दे रहा है, जिसका भुगतान उसके द्वारा कभी किया ही नहीं गया.

यह गौर करने वाली बात है कि अडानी समूह के मालिक गौतम अडानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खासम-ख़ास माने जाते हैं. बीते साल ये खबर चर्चा में थी कि केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने यूपीए सरकार के समय अडानी समूह पर पर्यावरण नियमों की अनदेखी के लिये लगाया गया 200 करोड़ रुपये का जुर्माना माफ़ कर दिया है. इसके साथ-साथ मंत्रालय ने अडानी पोर्ट एंड सेज के वाटरफ्रंट डेवलपमेंट परियोजना को दी गयी पर्यावरण क्लियेरेंस को भी बढ़ा दिया था.

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