राहुल गांधी की चीनी राजदूत से मुलाक़ात पर बवाल क्यों?

प्रियभांशु रंजन

टाइम्स नाउ के मुताबिक, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को नई दिल्ली में चीन के राजदूत से मुलाकात की. हालांकि खबर में कितना दम है, इसका बारे में अभी ठीक-ठीक नहीं कहा जा सकता. खैर, कुछ महानुभावों का मानना है कि चीन से तनाव के बीच राहुल को राजदूत से नहीं मिलना चाहिए था. कुछ लोग तो ये सवाल भी कर रहे हैं कि राहुल ने किस हैसियत से चीनी राजदूत से मुलाकात की. विदेश नीति के ऐसे ज्ञाताओं से कुछ कहना चाहता हूं  कि तीन दिन पहले आपके ‘आराध्य’ नरेंद्र मोदी ने चीन की तारीफ क्यों की? मोदी ने चीन के राष्ट्रपति से मुलाकात क्यों की, जबकि पहले से कोई मुलाकात तय नहीं थी? क्या तीन दिन पहले चीन से तनातनी नहीं चल रही थी?

क्या ट्रैक-2 कूटनीति (Track-2 Diplomacy) की ABCD जानते हैं? नहीं जानते हैं तो ज्ञान देने से पहले जान लें.

जब कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार खुद नाकाम हो रही होती है, तो रिश्ते सुधारने के मकसद से कभी विपक्षी नेताओं, कभी सिविल सोसाइटी, कभी फिल्मी हस्तियों, कभी कारोबारियों वगैरह का सहारा लेती है. इसे ही ट्रैक-2 कूटनीति (Track-2 Diplomacy) कहते हैं.

आपको क्या लगता है कि राहुल की चीनी राजदूत से मुलाकात के बारे में आपकी ‘प्रिय’ सरकार को पता नहीं रहा होगा? क्या पता कहीं सरकार ने ही तनाव कम करने के मकसद से बातचीत के लिए राहुल को भेजा हो?

राहुल के बारे में कुछ भी बोलने से पहले एक बात याद रखा करिए. स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप यानि SPG हर पल राहुल की सुरक्षा में रहती है. वो कहां जाते हैं, किससे मिलते हैं, ये सब SPG को पता होता है. SPG को पता होने का मतलब केंद्र सरकार को पता होना है.

बहरहाल, राहुल की ‘हैसियत’ पर सवाल उठाने वाले ये बताएं कि दूसरे देशों के नेता जब भारत आते हैं तो उनमें से ज़्यादातर नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी से क्यों मिलते हैं? मोदी दो साल पहले जब कनाडा गए थे तो उस वक्त विपक्ष में रहे और अब प्रधानमंत्री बन चुके जस्टिन ट्रुडू से क्यों मिले थे? सुषमा स्वराज बांग्लादेश गई थीं तो विपक्ष की नेता खालिदा जिया से क्यों मिली थीं?

जरा सोचिए!

प्रियभांशु रंजन

 

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