बिहारियों ! लालू को कभी माफ नहीं करना…

व्यालोक पाठक
यह देश अजीब है, इसकी मूर्खताएं देखकर तो लगता है कि मार्कण्डेय काटजू ने जो 90 फीसदी मूर्ख बताए थे, उनकी संख्या इस देश में कुछ अधिक ही है.
जब से लालू यादव पर सीबीआई का शिकंजा कसा है, उनके पक्ष में महान बुद्धिजीवियों, जनता के पत्रकारों, सामाजिक न्याय के अलम्बरदारों, पूरे विपक्षी नेताओं और Non Resident Bihari यानी बिहार के बाहर रोजी-रोटी कमा रहे बिहारी आ गए हैं.

ये जितने भी लोग हैं, इनके मुख्यतः कुछ खास तर्क इस तरह से हैं….क्या लालू से पहले बिहार का स्वर्णिम काल था ? क्या किसी सवर्ण नेता ने बिहार को बर्बादी की ओर नहीं धकेला? यह सब दरअसल सवर्णों की कुंठा है, लालू यादव तो असल में सामाजिक न्याय के वह मसीहा हैं जिन्हें ब्राह्मणवादी ताकतें उखाड़ फेंकना चाहती हैं….. और आखिरी तर्क यह कि नरेंद्र मोदी को एकमात्र चुनौती तो बिहार में ही मिली और वह भी लालू यादव की ओर से इसलिए सीबीआई का इस्तेमाल लालू को झुकाने के लिए किया जा रहा है. ये सारे तर्क लचर, भौंड़े, बीमार मानसिकता के और हास्यास्पद हैं. पहली बात तो यह कि अगर जगन्नाथ मिश्रा ने बिहार का बलात्कार किया भी तो भी लालू यादव को यह डिवाइन राइट नहीं मिल जाता. (वैसे जैसे लालू को लोग ललुआ कहते हैं, हमारा यहां जगन्नाथ ही जगरनत्था, कन्हा आदि नामों से जाने जाते हैं). 1967 तक बिहार उद्योग धंधों के मामलों से लेकर विकास के हरेक सूचकांक पर पूरे देश के साथ कदमताल कर रहा था, उस दौरान भी शायद सवर्णों की ही सरकार थी. जहां तक सवर्णों के षड्यंत्र का सवाल है, तो पिछले 25 साल से बिहार में सामाजिक न्याय के शासकों की सरकार है और फिलहाल केंद्र में प्रधानमंत्री भी सवर्ण नहीं हैं…..ऊपर लिखी सारी बातें मैंने बहुत वेदना में लिखी हैं लेकिन सुअरों को पकड़ने के लिए आपको कीचड़ में उतरना ही पड़ता है. मैं अधिक वक्त नहीं लूंगा, मैं आपको सीधे तौर पर बताना चाहता हूं कि लालू यादव के वे चार जघन्य अपराध कौन से हैं, जिनकी वजह से इस आदमी को सीधा जहन्नुम में झोंक दिया जाना चाहिए.

1. लालू ने संविधान का मजाक बना कर रख दिया- यह व्यक्ति जिस संविधान की कसम खाकर मुख्यमंत्री बना था, पंद्रह वर्षों के शासन काल में इसने उसकी चिन्दियां बिखेर दी. चाहे वह मुख्य सचिव से खैनी बनवाने का मामला हो, पूरे समाज के सामने उसे( अधिकारियों को ) अपमानित करना हो, चारा घोटाले के समय समर्थकों को उकसाने के लिए रिक्शे से कोर्ट जाना और अपने उपद्रवी समर्थकों को न रोकना, या फिर राबड़ी देवी जैसी अंगूठा छाप को एक राज्य के मुस्तक़बिल पर थोप देना हो. लालू यादव ने हर वो काम किया जो इस देश के संविधान के साथ बलात्कार सरीखा था. अपनी बेटी मीसा को न केवल मेडिकल कॉलेज में एडमिशन दिलवाया बल्कि उसे टॉपर भी बनवाया. उसकी शादी में टाटा के शोरूम से रातों रात गाड़ियां उठवा ली गईं. सैकड़ों व्यापारी राज्य छोड़ कर चले गए. इन सबके वाबजूद अगर आप लालू के समर्थन करते हैं तो मुझे आप पर घिन और दया दोनों आती है.

2. लालू यादव ने अपराध को संस्थागत बना दिया- चंपा विश्वास याद है आपको? शिल्पी जैन? गौतम गोस्वामी ? डॉक्टरों का अचानक मोहल्ला छोड़ कर चले जाना? ट्यूशंस सेंटर्स का अचानक बंद हो जाना? पटना में रहने वाले अभिभावकों का एडवाइजरी निकालना कि शाम सात बजे के बाद स्टेशन पर रुक जाओ लेकिन घर आने की कोशिश मत करो(लेखक भुक्त भोगी है, इसके मामा गर्दनी बाग में रहते थे और इसे स्टेशन से शाम 7 बजे के बाद निकलने की मनाही थी). ये सारी घटनाएं टिप ऑफ आइसबर्ग हैं. इसके बावजूद अगर आपको लगता है कि लालू आपके मसीहा हैं तो आपको सौ बार दंडवत प्रणाम.

3. लालू यादव ने बिहार की दो पीढ़ियां बिगाड़ दीं- किसी राष्ट्र के निर्माण में पांच साल बहुत होते हैं. दस साल बहुत होते हैं. पंद्रह साल तो एक युग से भी अधिक होता है. एक राज्य का निर्माण करने को लालू को पंद्रह साल मिले. उन्हौने राज्य को डेढ़ सौ साल पीछे धकेल दिया. जो लोग जगन्नाथ या उसके पहले वालों का हिसाब दे रहे हैं, उन्हें बता दूं कि मेरे बचपन तक पीएमसीएच जिंदा था. पीएमसीएच चहकता था. पटना यूनिवर्सिटी, पटना साइंस कॉलेज, दरभंगा का एलएमएनयू,  ये सारे संस्थान जीवित थे. जगन्नाथ ने इनको बेहोशी दी थी, लालू ने इनको मार दिया. 1989 से लेकर 1997 तक की जो दो पीढ़ियां बिहार में बड़ी हुई हैं (सवर्ण-अवर्ण का झंझट छोड़ दीजिए) उनसे बस एक बार लालू यादव के बारे में उनके खयालात पूछ लीजिये. अगर अब भी आप लालू को बचाना चाहते हैं तो आप आत्महन्ता हैं. और अंतिम ….

4. लालू ने सामाजिक न्याय के नाम पर पीड़ितों और वंचितों को ठगा- बिहार की कितनी फीसदी आबादी साक्षर है? बिहार में मातृत्व मृत्युदर क्या है? बिहार में पिछड़ों और दलितों की साक्षरता का प्रतिशत क्या है? बिहार में लालू के शासनकाल के पंद्रह वर्षों में कितने किलोमीटर सड़क बनी. लालू ने कभी मुसहर बस्ती में जाकर बच्चों के बाल काटने या उनको उड़नखटोला दिखाने के अलावा कौन सा काम किया? लालू ने बिहार को जो पंद्रह साल में नासूर दिया है, इन सबके बावजूद अगर लालू के लिए निरंतर आपका समर्थन है तो मैं जानता हूं कि आपने कुछ भोगा ही नहीं.

ये महज़ बानगियां हैं. लालू हों, मायावती, जयललिता, करुणानिधि, या फिर मधु कोड़ा. हरेक के समर्थन में ऐसी दलीलें आती हैं कि आप सर पीट कर रह जाएंगे. ये देश ऐसा ही है. अब मुझे पता लगता है कि हम लगभग 1200 वर्षों तक ग़ुलाम क्यों रहे.
शायद मुझे आत्महत्या कर लेनी चाहिए…..

व्यालोक पाठक स्वतंत्र पत्रकार हैं. प्रस्तुत आलेख लेखक के निजी विचार हैं.

 

1 COMMENT

  1. लालू को तो मैं बहुत अच्छे से समझता हूँ। समझने में चूक मुझसे सुशासन बाबू के मामले में हुई। क्या सोचकर..साला क्या सोचकर नितीश ने लालू को अपने दम पुनर्जीवन दिया।

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