बेहतर कल के लिए वैकल्पिक उर्जा पर निर्भरता बढ़ाएं, साइकिल को चलने दें !

मणेन्द्र मिश्रा मशाल

एंबुलेंस और सरकारी योजनाओं से ‘समाजवादी’ नाम हटाये जाने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब अखिलेश यादव सरकार में सड़क किनारे बनवाये गये साइकिल ट्रैक तोड़ने जा रही है. ‘साइकिल’ समाजवादी पार्टी का चुनाव चिन्ह भी है. जाहिर है वर्तमान सरकार के इस फैसले के राजनीतिक निहितार्थ भी हैं. पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार ने लखनऊ, कानपुर, नोएडा, बरेली समेत अन्य बड़े शहरों में यह ट्रैक बनवाया था. इसके पीछे समाजवादी नेतृत्व का उद्देश्य था कि इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और लोगों की सेहत दुरुस्त रहेगी. लखनऊ और नोएडा में 100 किलोमीटर का ट्रैक बनाया गया था. राजधानी लखनऊ में बने 35 किलोमीटर के ट्रैक का उद्घाटन अखिलेश यादव ने साल 2015 में किया था.

पिछले वर्ष टाटा रिसर्च इंस्टिट्यूट के एक अध्ययन में दिल्ली, मुम्बई जैसे महानगरों में घने कोहरे के पीछे भयावह प्रदूषण खासकर वाहनों से निकलने वाले धुएं को पाया गया. संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण कार्यक्रम (यूनेप) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार शहरों की रोशनी धुंधलाने लगी है, सूरज से आती रोशनी छन रही है, रुक रही है. हर साल ग्रीष्म ऋतु के आरंभ होते ही पूरे देश से पानी के भयावह संकट की खबरें आने लगती है. यही नहीं, हिमालय की शोभा बढ़ाते ग्लेशियर पिघल कर बौने हो रहे हैं, जीवनदायनी गैस ऑक्सीजन की मात्रा में कटौती हो रही है. ऐसे में ग्रीन हाउस गैसों में कमी के लिए साइकिल के प्रयोग जैसी पहल को बेहद लोकप्रिय बनाये जाने की विशेष जरुरत है.

प्राकृतिक संसाधनों के बेहिसाब दोहन के इस दौर में जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव से बचने के लिए जनता को सतत जागरूक किया जाना अनिवार्य हो गया है. जिससे आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा रवैया प्रकृति के सन्दर्भ में जिम्मेदार हो सके और हम एक बेहतर भविष्य की कल्पना कर सकें.

हमारे समय के गंभीर उर्जा संकट को देखते हुए पूर्व समाजवादी सरकार का वैकल्पिक उर्जा पर निर्भरता बढ़ाने वाले कदम बड़े महत्व वाले थे. उत्तर प्रदेश  के महोबा जिले के करहरकला गांव में अब तक के सबसे बड़े 10 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट की स्थापना करना इनमें से एक है. इस कदम के अतिरिक्त महानगरों में जैव ईधन से चलने वाली ग्रीन बसों का संचालन शुरू करना पर्यावरण की दृष्टि से अच्छी पहल थी. एथेनाल से चलने वाली ये बसें स्वीडन द्वारा निर्मित थीं. जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है. इन बसों के प्रयोग से जहां एक ओर पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिली वहीँ डीजल एवं पेट्रोल की खपत में कमी भी आई. उत्तर प्रदेश में एथेनाल की पर्याप्त उपलब्धता से इस प्रयोग के आसानी से सफल होने की संभावना थी.

इकोफ्रेंडली की दिशा में बढ़ते हुए अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री कार्यालय में पेपरलेस नीति शुरू किया था. जिससे कार्यालय के सभी काम कंप्यूटर पर ही हो और पेपर की बचत करने की दिशा में गंभीर हुआ जा सके. बहुत दिन नही हुए जब बड़े उर्जा संकट की वजह से सरकार पर प्रदेश के नागरिकों का दबाव बढ़ रहा था. केंद्र सरकार द्वारा बिजली की कम आपूर्ति और प्रदेश में भारी खपत की वजह से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था. ऐसे में एक ही विकल्प वैकल्पिक उर्जा साधनों पर निर्भरता बढ़ाने की विशेष जरुरत महसूस की गयी.

सोलर उर्जा के प्रति गांवों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लोहिया ग्रामीण आवास योजना के तहत प्रत्येक घर को सोलर लाइट उपलब्ध कराने के साथ ही किसानों को सिचाई हेतु सोलर पंप के लिए 50% छूट की व्यवस्था पारिस्थिकी संतुलन बनाये रखने का ठोस कार्य था. जिससे आने वाले समय में ग्रामीण स्तर पर बिजली कटौती से होने वाले संकट के प्रभाव को कम किया जा सकता था. इस शुरुआत को धीरे-धीरे व्यापक स्तर पर बढ़ाये जाने की विशेष जरुरत थी.

2012 में समाजवादी सरकार गठन के साथ ही अखिलेश यादव ने सोलर नीति के माध्यम से पर्यावरण संकट के प्रति अपना नजरिया स्पष्ट कर दिया था. बतौर सूबे के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा लगातार वैकल्पिक उर्जा स्रोतों पर निर्भरता को बढ़ावा देने का कार्य सराहनीय था. आस्ट्रेलिया में पर्यावरण इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अखिलेश यादव का सार्वजनिक मंचो से साइकिल का प्रयोग को बढ़ावा देना पारिस्थितिकी संतुलन बनाये रखने में दूरदर्शी कदम था. जिससे सार्वजनिक जीवन में छोटे दूरी के कार्यों के लिए साइकिल का प्रयोग जोर-शोर से बढ़ाया जा सके. जो न केवल पर्यावरण सुधार और फिटनेस बनाये रखने के लिहाज से बल्कि गंभीर ट्रैफिक समस्या से भी निजात दिलाने में उपयोगी है.

इसी को ध्यान में रखकर समाजवादी सरकार ने साइकिल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत फैसला लिया था. इसके अंतर्गत सभी मेट्रो शहरों में साइकिल ट्रैक बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया. लाल रंग के इस साइकिल ट्रैक में डेनमार्क/नीदरलैंड के सफल माडल के आधार पर यहां ट्रैफिक माडल बनाया गया. सरकार ने 1962 के भारतीय सड़क कांग्रेस के साइकिल ट्रैक  के तहत डिज़ाइन और लेआउट के अनुसार जारी नियमों के अनुरूप नियमावली और निर्देशिका भी जारी किया.

अखिलेश का लखनऊ में साइकिल ट्रैक का उद्घाटन करना राजधानी को वैश्विक स्तर के अनुकूल बनाने की नीति का प्रमुख अंग था. जिसके तहत साईकलिंग को लोकप्रिय बनाने हेतु लखनऊ में गुरु गोविन्द सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में 10793.70 लाख से वेलोड्रम स्टेडियम के निर्माण की कार्यवाही शुरू किया गया था. अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं और बुनियादी ढांचे वाला यह उत्तर प्रदेश का पहला इंडोर स्टेडियम होगा जिसमें आठ साइकिल ट्रैक होंगें. देश के सबसे बड़े सूबे के युवा नेतृत्व का सार्वजनिक जीवन में प्रयोग होने वाले वाहन से गहरा जुड़ाव लोकतंत्र में जड़ों से जुड़े रहने का अच्छा उदाहरण बन सका था.

लोकतंत्र में सरकारें आती और जाती रहती हैं, लेकिन यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने सीमित और बहुमूल्य संसाधन का प्रयोग किस तरह, किसके लिए, किन मूल्यों और मान्यताओं के लिए करें. निश्चय ही मानवीय, वैज्ञानिक व समाजवादी दृष्टि के आलोक में हमें इन प्रश्नों का समाधान तलाशना होगा. ध्यान रहे, पर्यावरण संरक्षरण सभी की एक साझी जिम्मेदारी है.

(मणेन्द्र मिश्रा मशाल; लेखक समाजवादी विचारधारा से जुड़े हैं.)

Email: mishra.marinder@gmail.com

 

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