सामाजिक न्याय का राग अलापने वालों ! लालू ने कौन सा न्याय शास्त्र गढ़ा है?

व्यालोक पाठक 

लेखक से उनके एक मित्र ने सवाल किया है कि जब आप जद-यू और भाजपा की मिलीजुली सरकार को अपना समर्थन दे सकते हैं, तो राजद में क्या बुराई है? 

ठीक बात है. हमारी आदत भी बुरे को बुरा कहने की है, इसलिए सरकार गठन के इस तरीके का मैं भी समर्थक नहीं, पर लालू यादव से मुझे नफरत की हद तक विरोध क्यों है?

लालू ने हम जैसी पूरी दो पीढियां बर्बाद की हैं. 1990 के पहले पैदा होने वाले करोड़ों बिहारी इसकी ताकीद करेंगे. मैं आज दो रुपये कमाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर भी इस राज्य में कुछ नहीं कमा पाया, इसलिए मुझे चिढ़ है.
लालू ने जिस जातिवादी राजनीति को खलनायक बताया और उसके पुरोधा बनकर खड़े हुए, उसे उन्होंने परिवारवाद का भद्दा कैरिकेचर बना दिया.
मेरे समय का कोई भी आज का युवा लालू और सुभाष व साधु यादव को भूल सकता है क्या?
लालू ने सभी उद्योगों और शिक्षा संस्थानों को संस्थागत रूप से ढहा दिया.
लालू ने गरीबों का क्या कल्याण किया? अपने लिए 1000 करोड़ का चारा, गरीबों के लिए उड़नखटोला की धूल?
अपने गुरु जगन्नाथ मिश्र की तरह उन्होंने शिक्षा से दुश्मनी निकाली. नतीजा- बिहारी बच्चे गाली खाएं, पढ़ें और क्लर्क बनें.
कितने उद्योग लगे? कृषि का क्या? गरीबों और मज़लूमों का?
टाटा के शोरूम से गाड़ियां उठाना, शिल्पी हत्याकांड, चंद्रशेखर की हत्या, 7 बजे शाम के बाद पटना स्टेशन पर ही रुकना…ये सब आप भूल जाएंगे, मैं नहीं.
क्योंकि जो D M C H कभी हज़ारों मरीजों को जीवन देता था, वह आज खुद मौत की कगार पर है. कभी दरभंगा आइए, बरसात में. PCH का क्या हाल होगा, वो बस सोच लीजिये.
मैं 1000 कि मी दूर JNU में पढ़ने गया. मात्र 17 की अवस्था में. क्यों? क्योंकि , बिहार में कुछ नहीं बचा था. पूरे एक शहर कोटा की आमदनी बिहारी विद्यार्थी चलाते हैं? क्योँ?  क्यूंकि विकल्प नहीं हैं. क्योंकि इस राज्य के युवा के नसीब में अप्रवासी मजदूर बनने से इतर लालू की राज्य सत्ता ने कोई दूसरा विकल्प नहीं गढ़ा.

बिजली, सड़क, पानी से लैस एक अदद शहर आज बिहार में मयस्सर नहीं. क्यों?
एकमात्र उद्योग अपहरण था. क्यों?
बिहार में तत्कालीन युवा हृदय सम्राट साधु यादव ने JNU के विद्यार्थियों पर फायर किया. क्यों?
सिवाय परिवारवाद के इस यादव परिवार ने बिहार को और क्या दिया? बता पाएंगे?

लिस्ट बहुत लंबी है, पर सबसे बड़ा अपराध है लालू का बिहार की दो पीढ़ियों को गर्त कर देना.
आपके हिम्मत की दाद देता हूँ कि आप अब भी लालू जैसे का समर्थन करते हैं, कामरेड्स और उनकी खाल में छिपे भीषण जातिवादी हैं आप! प्लीज, इस सब के बारे में कोई सामाजिक न्याय का राग अलापने से पहले, मेरे सारे पोस्ट्स और लालू यादव के 17 साल माप लीजियेगा.

साथी शायद अब आप जान गए होंगे कि मैं मरते दम तक लालू को क्यों नहीं सपोर्ट करूंगा !

व्यालोक पाठक स्वतंत्र पत्रकार हैं. प्रस्तुत आलेख लेखक के निजी विचार हैं.

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