बावर्चीखाना-ए-लखनऊ : जानिए गलावटी क़बाब के गलावट का राज

असद उल्लाह

लखनऊ के गलावटी क़बाब के क्या कहने, जनाब इसका नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है, पर क्या आप जानते है इसमें गलावट का राज़ क्या है, और ये गलावट क्या है जिसकी वजह से हम इसको गलावटी क़बाब कहते हैं.

असल में कच्चे पपीते को ही गलावट कहते हैं, इस कच्चे पपीते को आप इतना अदना भी ना समझें, दरअसल  गलावटी क़बाब का सारा दारोमदार इसी पर टिका होता है, ये कच्चा पपीता ही कीमे को गलाने का काम करता है, असल में तभी तो क़बाब मुंह में रखते ही घुल जाता है और इसी वजह से कच्चे पपीते को पुराने लखनऊ में लोग गलावट कहते हैं, लोग बाजार में इसको खरीदने के लिए कहते है, भैया गलावट कैसे दिए या क्या हिसाब दिया.

और इसी वजह से इस लज़ीज़ पकवान के नाम के पहले गलावट का इस्तेमाल होता है, और हम सब इसको गलावटी क़बाब कहते हैं.

नवाबों को कबाब बड़े ही पसंद हुआ करते थे, लेकिन जैसे ही उनकी उम्र बढती गई और उनके दांत कमजोर होने लगे तब उन्‍होंने अपने खास बावर्ची से मुलायम कबाब बनाने की फर्माइश की, जिसे वे अपने बिना दांतों वाले मुंह से खा सकें. इसके बाद उनके शाही बावर्ची ने इस कबाब का निमार्ण किया. आइये जानते हैं गिलौटी कबाब को बनाने की विधि.

चलिए बनाते  हैं गलावटी क़बाब !

सबसे पहले 500 ग्राम महीन क़ीमा लेते  हैं, और हां ज़रूरी बात ये है कि क़ीमा बिलकुल महीन और रूखा होना चाहिए, इसे साफ़ धो के अलग रख लें, अब बात करते है इसके मसालों की, 2-2 छोटे चम्मच जीरा और सौंफ अलग-अलग, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च, एक फूल जावित्री, एक छोटा टुकड़ा जायफल और दो बड़ी इलाइची, दो छोटे चम्मच कड़ी धनिया, 6 खड़ी लाल मिर्च.

अब इन सब मसालों को तवे पर हल्का भून लें, जब भीनी-भीनी खुशबु आने लगे तब मसाले तवे से हटा लें, अब दो छोटे चम्मच खशखश (जिसे पोस्ता भी कहा जाता है) और 6 काजू को लें और भुने हुए मसालें में एक साथ पीस लें और अलग रख लें, अब 500 ग्राम प्याज को महीन काट लें, प्याज को बादामी होने तक फ्राई करें.

अब 150 ग्राम गलावट यानि कच्चा पपीता और फ्राई की हुई प्याज़ को पीस कर पेस्ट बना लें और इसमें दो छोटे चम्मच पिसी अदरक भी मिला लें, अब पपीते, प्याज़ व अदरक के पेस्ट को कीमे में अच्छे से मिला लें, साथ ही नमक भी जरूरत के हिसाब से मिला लें. कीमे को 4-5 घंटो तक रख दें, अब 200 ग्राम बेसन भून लें और बेसन के साथ पूरा मसाला कीमे में मिला दें, मसाला यानि 2-2 छोटे चम्मच जीरा और सौंफ अलग-अलग, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च, एक फूल जावित्री, एक छोटा टुकड़ा जायफल और दो बड़ी इलाइची, दो छोटे चम्मच कड़ी धनिया, 6 खड़ी लाल मिर्च. ये मसाला इतना ज़बरदस्त होगा कि आपके हाथ महक उठेंगे.

अब इमली के कोयले को सुलगाना है, आग जलाने के बाद जब यह कोयला दहकने लगे तो इस दहकते कोयले को कटोरी में रख कर कीमे के बीच में रखेंगे. अब बहुत ही नफासत से हम देसी घी को इमली के कोयले में धौंका देंगे यानि देशी घी धधकते कोयले पर डालेंगे. अब देसी घी वाले कोयले सहित पूरे कीमे को ढक दें, फिर क्या फ्लेवर आएगा इसका तसव्वुर ( इमेजिनेशन) आप कर लें, अब कीमे की टिकिया बना कर फ्राई कर लें और फिर जैसे ही इस क़बाब को आप खायेंगे ये आपके मुंह में घुल जाएगा और आप इसके लज़ीज़ ज़ायक़े में खो जाएंगे.

आगे और भी बहुत कुछ है जो हम आपसे साझा करेंगे. अपने अगले हिस्से में, कुछ और ज़ायक़ेदार कहानियां…तरह तरह के खानों के साथ और हां बनाने के तरीक़े और बारीकियों पर भी गुफ़्तगू होगी…
तब तक के लिए इजाज़त दीजिए….मिलते हैं यहीं न्यूज़ कैप्चर्ड पर.
असद उल्लाह टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ सोशल साइंस के छात्र रहें हैं, लखनवी जायके के गहरे जानकार हैं !

 

5 COMMENTS

  1. आपने ये कॉलम अच्छा शुरू किया।राजनीति के कबाब से इतर कुछ तो टेस्ट चेंज होगा और मन भी।

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