नेपाल में भारत के फिर खिलाफ आक्रोश ! क्या है चीन की मदद का मनोवैज्ञानिक आयाम ?

रुपेश पाठक

बाढ़ की चपेट में आए नेपाल को चीन ने 10 लाख डॉलर की मदद देने की घोषणा की है. चीन के वाइस प्रीमियर वांग यांग ने नेपाल से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की कड़ी में इस मदद की घोषणा की थी.

चीन के साथ जारी डोकलाम विवाद के बीच भारत के लिए चिंतित होने की वजह इसलिए है क्योंकि नेपाल के तराई क्षेत्र में जो बाढ़ आई है वह भारत की तरफ़ से सीमाई इलाक़े में एकतरफ़ा बनाए गए बांधों के कारण है. नेपाली मीडिया में कहा जा रहा है कि भारत द्वारा बनाए गए ऐसे क़रीब 15 बांधों के कारण नेपाल का ऊपरी इलाक़ा बाढ़ की चपेट में है. इसे लेकर भारत के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भी है कि उसने नेपाल में अनाधिकृत रूप से बांधों का निर्माण किया है.

ऐसे में चीन की मदद का एक मनोवैज्ञानिक आयाम है. वो भी तब जब भारत और चीन के बीच सीमा पर भारी तनाव है. नेपाल पिछले तीन दशकों की सबसे भयानक बाढ़ से जूझ रहा है. नेपाल में इस बार की बाढ़ काफ़ी भयावह है. पिछले 21 सालों से ऐसी बाढ़ नहीं आई थी. 15 अगस्त तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 115 हो गई है. पीड़ितों को “तत्काल राहत” पहुंचाने के लिए चीन ने नेपाल की मदद के लिए 10 लाख डॉलर (6.4 करोड़ रुपये) दिए हैं. चीन ने नेपाल के साथ कई अरब डॉलर का समझौता भी किया है जिससे दोनों देशों के आपसी रिश्ते पहले से मजबूत होंगे. नेपाल और चीन के बीच तीन अलग-अलग समझौते हुए – पेट्रोलियम, गैस और खदान क्षेत्र के लिए दो अरब डॉलर की परियोजनाओं, 2015 के भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए आरनिको राजमार्ग के पुनर्निमाण और केरूंग-रासुवागार्ही रोड के निर्माण के लिए 15 अरब डॉलर की परियोजना पर समझौता किया है.

चीन ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए नुकसान के आकलन का भी इंतजार नहीं किया. उप-राष्ट्रपति वांग ने भूकंप में क्षतिग्रस्त हो गए नेपाल के पूर्व शाही महल के निर्माण का उद्घाटन किया. भूकंप के दो साल बाद चीन ने इस शाही महल की मरम्मत के लिए आर्थिक मदद दी थी. वांग ने केपी ओली और पुष्प कमल दहल “प्रचंड” से भी मुलाकात की.

 

 

 

रुपेश पाठक

 

 

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