माननीय अडानी साहब ! एक मानहानि का मुकदमा ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन पर भी ठोक दें !

मोदीजी से अनुरोध है कि विदेशी मीडिया पर भी थोड़ा अंकुश लगाने का प्रयास करे, ओर माननीय अडानी साहब से भी विनती है कि एक मानहानि का मुकदमा ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन पर भी ठोक दें, ताकि उस अखबार के ट्रस्टी हुजूर माईबाप कहते हुए आपके पैरों पर गिर पड़े,ताकि आप उसके निरीह सम्पादक को निकालने का सौदा कर सकें.
गार्डियन को मिले दस्तावेज के अनुसार भारतीय कस्टम विभाग के डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवन्यू इंटलीजेंस (डीआरआई) ने आपके यानी अडानी समूह के खिलाफ फर्जी बिल बनाकर करीब 1500 करोड़ रुपये टैक्स हैवेन (टैक्स चोरों के स्वर्ग) देश में भेजने का आरोप लगाया है.
अखबार यह भी कहता हैं कि अडानी समूह ने दुबई की एक जाली कंपनी के माध्यम से अरबों रुपये का सामान महाराष्ट्र की एक बिजली परियोजना के लिए मंगाया और बाद में कंपनी ने वही सामान अडानी समूह को कई गुना ज्यादा कीमत पर बेच दिया. रिपोर्ट के अनुसार अडानी समूह ने इन सामान की कीमत बिल में औसतन चार गुना ज्यादा दिखाया.
अब सवाल यह पैदा होता हैं कि इस पैसे का किया क्या गया ? गार्डियन कहता है कि अडानी समूह ने दक्षिण कोरिया और दुबई की कंपनियों के माध्यम से मारीशस स्थित एक ट्रस्ट को पैसा पहुंचाया जिस पर अडानी समूह के सीईओ गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नियंत्रण है. हाल ही में सेबी तीन लाख शैल कम्पनियो पर कार्यवाही की बात कह रही थी उसमें शायद ये कंपनियां नहीं आती होगी ! खैर जाने दीजिए.
अब जरा लगे हाथों विनोद अडानी के बारे मे भी जान लीजिए, पनामा पेपर्स में इनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है, चाहे पड़ोस के देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपनी गद्दी पनामा पेपर्स के कारण छोड़ना पड़े ! लेकिन यहाँ भारत मे इस मामले में पत्ता भी नही खड़कता.
भारतीय बैंकों के अनुसार विनसम डायमंड्स देश की दूसरी सबसे बड़ी डिफॉल्टर कंपनी है. इसके मालिक जतिन मेहता विनोद अडानी के समधी है, मेहता के बेटे सूरज की शादी कृपा से हुई है. कृपा , गौतम अडानी के भाई विनोद शांतिलाल अडानी की बेटी हैं.
जतिन मेहता भी विजय माल्या की तरह सेंट किट्स में जाकर बैठ गए है, चूंकि विजय माल्या का कांग्रेस कनेक्शन जग जाहिर है इसलिए उसका मामला हमेशा सुर्खियों में बना रहता है, लेकिन जतिन मेहता, अडानी कनेक्शन की वजह से आसानी से बच जाते है.
मीडिया रिपोर्टे कहती हैं कि मेहता पर स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक समूह के 4,680 करोड़ रुपये और पंजाब नेशनल बैंक समूह के 2121.82 करोड़ रुपये बकाया हैं. इस तरह विनसम एवं सहयोगी कंपनियों पर कुल 6,700 करोड रुपये बकाया हैं. बैंको ने इस रकम को अपने डूबत खाते में शामिल कर लिया है.
अब अनोखा तथ्य विनोद अडानी के बारे में ओर जान लीजिए. ऑस्ट्रेलिया के अग्रणी मीडिया समूह फेयरफैक्स मीडिया ने दावा किया था कि एबॉट प्वाइंट पोर्ट की लीज उनके नाम पर है, न कि गौतम अडानी के नाम पर. ओर यह लीज अडानी की ऑस्ट्रेलिया स्थित महत्वाकांक्षी कार्माइकल कोल माइन प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है.
अब भगवान ही जानता है कि भारतीय स्टेट बैंक ने 6000 करोड़ का कर्ज अडानी को कैसे और किस बिना पर दिया है
लेकिन एक बात तो तय है कि हमें अब सच्चाई जानने के लिए विदेशी मीडिया पर ही निर्भर रहना होगा, देसी मीडिया की तो अब कोई ताकत नही बची है जो हमें सच्चाई बता पाए.
गिरीश मालवीय स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं.

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