सच्चे जनपक्षधर वैज्ञानिक थे लीनस पॉलिंग

श्वेता कौल

बीती 19 अगस्त को प्रसिद्ध अमेरिकी वैज्ञानिक लीनस पॉलिंग की पुण्यतिथि थी. अमेरिकी वैज्ञानिक लीनस पॉलिंग उन वैज्ञानिकों की तरह नहीं थे जो केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रहकर आम जनता और समाज में उथल-पुथल पैदा करने वाली सरगर्मियों से दूर रहे हों.वे एक वैज्ञानिक होने के साथ-साथ सामाजिक-राजनितिक कार्यकर्ता भी थे.

विज्ञान के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने इस बारे में नयी खोज की कि विभिन्न रसयानों के अणुओं की रचना के लिए परमाणु आपस में किस तरह जुड़ते हैं.पॉलिंग की अनुसन्धान टीम ने इस बारे में समझ विकसित की कि कैसे अणुओं को एक-दूसरे से अलग करके नए रूप में व्यवस्थित किया जाए. इसने केमेस्ट्री मॉलिक्यूलर बायोलजी जेनेटिक्स (Chemistry Molecular Biology Genetics) आदि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. पॉलिंग ने  सिकेल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anemia) के अध्ययन पर भी अपना ध्यान केंद्रित किया जिसकी वजह से बहुत से अफ्रीकी मूल के अश्वेत प्रभावित हो रहे थे. साथ ही उन्होंने एंटीबॉडीज (Antibodies) और एनेस्थेसिया (Anesthesia) के बारे में नए सिद्धांत विकसित किये. उन्होंने (DNA) की संरचना को समझने में भी अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान दिया. उन्होंने विभिन्न रोगों के रोकथाम और इलाज की एक सस्ती और मानव शरीर के लिए अधिक अनुकूल पद्धति के तौर पर मल्टी विटामिन थेरेपी (Multi Vitamin Therapy) का विकास किया.उनके इस आविष्कार ने चिकित्सा तंत्र से जुड़े मुनाफे पर चोट की जिसने चिकित्साक्षेत्र से मुनाफा कमाने वाले तमाम स्वार्थी गिरोहों और लुटेरों को बेचैन कर दिया.

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब अमेरिका अपनी परमाणु ताकत का इस्तेमाल करके दुनिया पर अपनी धौंस जमाने लगा तब पॉलिंग ने अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे प्रगतिशील वैज्ञानिक हस्तियों के साथ मिलकर दुनिया को नाभिकीय युद्ध के खतरों से आगाह करवाया. कुख्यात मैकार्थी काल के दौरान उन्होंने सोवियत विरोधी अभियान में शामिल होने से इंकार कर दिया. उन्हें कम्युनिस्टों का हमदर्द बताकर तरह-तरह से अमेरिकी अधिकारियों ने परेशान किया. उन्होंने वियतनाम युद्ध विरोधी अभियानों में भी हिस्सेदारी की.

पॉलिंग का जीवन एक सच्चे,सरोकारी, जनपक्षधर वैज्ञानिक का जीवन है.

      श्वेता कौल

 

 

 

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