रेल दुर्घटनाओं पर वही ढाक के तीन पात

गिरीश मालवीय

ताइवान में बिजली चले जाने पर ताइवान के आर्थिक मामलों के मंत्री इस्तीफा दे दिया है. एक ओर अपना भारत है, जहां पर सबका साथ सबका विकास करने वाली सरकार के रेलवे मंत्री का,यह सिद्ध होने के बाद भी कि मुजफ्फरनगर का कल का हादसा रेलवे की लापरवाही का नतीजा हैं ,बाल भी बांका नही होता,
बल्कि यह होता हैं कि सूरेश प्रभु बस एक ट्वीट कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं.

रेलवे विभाग में होने वाले हादसों पर अब तक के मनन-मंथन के बाद यह पाया गया है कि 80 फीसद दुर्घटनाएं मानवीय चूक के कारण होती हैं. आज की हालत यह है कि रेलवे में सुरक्षा का कामकाज देखने वाले कर्मचारियों के 1.27 लाख पद खाली पड़े हैं. नतीजतन बाकी कर्मचारियों पर काम का भारी दबाव है. इससे भी रेल हादसे बढ़े हैं.

इसके चलते हादसों पर अंकुश नहीं लगाया जा सकेगा. भारत में 2016 में छोटे-बड़े 80 हादसे हुये थे जबकि 2015 में 69 रेल हादसे हुए थे. 2014-15 में 131 रेल हादसे हुए और इसमें 168 लोग मारे गए. 2013-14 में 117 ट्रेन हादसे हुए और इसमें 103 लोग मारे गए थे. 2011-12 में जो 115 रेल दुर्घटनाएं हुर्इं, उनमें से 87.78 फीसद मानवीय भूल के कारण हुर्इं. 2014-2015 में 60 फीसदी रेल दुर्घटना ट्रेनों के पटरी से उतरने के कारण हुई थी.

इंदौर पटना ट्रैन के कानपुर हादसे का कारण भी रेल पटरी टूटना ही था इस घटना के बाद रेलवे बोर्ड ने ये 7 घोषणा की थी

  1. रेलकर्मियोंको प्रभावी तरीके से प्रशिक्षण देना और इसका ऑडिट करना.
  2. रेलवे के विभिन्न विभाग मेंटीनेंस ड्राइव चलाएंगे और सेफ्टी विभाग इसका ऑडिट करना.
  3. रेल लाइनों की जांच के लिए मेंटीनेंस ड्राइव.
  4. रेल कोच और रेल लाइनों की तकनीकी जांच रेल पटरियों की जांच के लिए अल्ट्रा सोनिक तकनीक का इस्तेमाल.
  5. नई ट्रेनों को चलाने के लिए लाइन क्षमता और संरक्षा पहलुओं की जांच.
  6. ट्रेनों में एलएचबी तकनीक वाले कोच बढ़ाना.
  7. आईसीएफ में निर्मित परंपरागत कोच में सेंटर बफिंग कपलर लगाकर दुर्घटना को रोकना.

 

लेकिन जैसे ओर सब सरकारी घोषणाओं का हश्र होता हैं वही इन घोषणाओं का भी हुआ और आज फिर हम रेलवे की बदहाली का तमाशा मुजफ्फरनगर में देख रहे हैं,
यह सरकार अपना बेशर्म चेहरा लेकर एक बार फ़िर जनता को दिखा रही हैं.

यह पोस्ट गिरीश मालवीय की फेसबुक वाल से साभार. 

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