कितना भयानक होगा जब आप चुप होने को अभिशप्त होंगे !

अभिषेक प्रकाश | राजा राम मोहन रॉय की एक कविता है जिसमे वह लिखते हैं कि-- 'जरा विचार कीजिये वह दिन कितना भयानक होगा जब आपकी मृत्यु...

जरूरत है इतिहास की पुनर्लेखन की

व्‍यालोक | इतिहास का पुनर्लेखन एक ऐसा विषय है जिसकी ज़रूरत को भारतीय राजनीति में वामपंथी से लेकर दक्षिणपंथी तक दोनों धड़े बराबर महसूस करते...

हैदर: हसीन वादियों में खूंरेज़ी की दास्तान

व्‍यालोक पाठक | हैदर नाम की इस फिल्म को अगर आप कश्मीर-समस्या के बरक्स देखेंगे, तो कई तरह की गलतफहमी पैदा होने के अंदेशे हैं....

ये शहर आब को तरसेगा चश्‍म-ए-तर के बगैर…  

  बनारस: सावन, 2016  अभिषेक श्रीवास्‍तव  एक ये कहानी सावन की है. सावन, जो बीते कुछ वर्षों में पहली बार ऐसे आया है गोया वाकई पहली बार ही...

कलकत्ता : जहां डॉन भी बेज़ुबान है…

अभिषेक श्रीवास्‍तव | हर चीज़ में राजनीतिक नाक घुसेड़ने की आदत बहुत बुरी है. कलकत्ता शहर से लौटे मुझे कितने  दिन हो गए हैं. मन में,...

भगत सिंह की नजर में नेहरु और बोस  

  भगत सिंह | आज़ादी की लड़ाई के दौरान भगत सिंह महज एक रूमानी नौज़वान नहीं थे. जो 'हँसते हँसते सूली पर चढ़ गया'. वे तत्कालीन...

संघ का मिशन मोदी

  बद्री नारायण | (EPW से साभार अनुदित) अनुवाद- अभिनव श्रीवास्तव "...संघ का राजनीतिक धड़ा भाजपा है और संघ ये दावा करता है कि वह कभी भी किसी राजनीतिक...

युद्धोन्माद और ‘बासू, द लिटिल स्ट्रेंजर’

रोहित जोशी | उड़ी हमले के बाद से बरास्ता मीडिया देश फिर युद्धोन्माद में है. इसलिए पुन:श्च.. तबियत खराब हो, रात में नींद नहीं आ रही...

लड़कियों की ‘हिंट’ समझने से पहले ‘पिंक’ देखें

फिल्म समीक्षा उमेश पंत | कभी-कभी केवल अंडरटोन से काम नहीं चलता. कुछ बातें होती हैं जो दो-टूक , साफ़-साफ़ कहनी पड़ती हैं. जब समाज का...

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

सत्येन्द्र रंजन |  क्या 1947 में भारत के बंटवारे को रोका जा सकता था? अथवा, इसके लिए प्राथमिक रूप से कौन दोषी था? ये ऐसे...